अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर


         आओ आओ बादल

 
 
आओ आओ बादल,
सावन में ऐसे-
मत तरसाओ बादल!

हों ध्वस्त प्रतीक्षाएँ
सबकी पूरी हों- लंबित-सी इच्छाएँ!
आओ आओ बादल मस्त मयूरा हो-
ऐसा गाओ बादल!

हलचल-सी मच जाए
बाँहें फैलाकर- मुस्काता कल आए
आओ आओ बादल प्यासे मरुथल में-
जल बरसाओ बादल

धरती सूखी चटकी
प्यासी हिरनी भी- फिरती भटकी-भटकी
आओ आओ बादल अर्जी अधरों की-
मत ठुकराओ बादल

कुछ पीर पिघल जाएँ,
बंजर धरती में- कुछ अंकुर उग आएँ!
आओ आओ बादल मरते सपनों में-
जीवन लाओ बादल

- डा. रामेश्वर प्रसाद सारस्वत
१ अगस्त २०२४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter