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          बादल ताँका

 
 
१
बादल घिरे
सोंधी पाती ने जोड़े
टूटे संबंध
मरुथल हिय में
घोले प्रेमिल रंग
२
बाँधे घुंघरू
मलय पवन ने
होंठो पे राग
मेघों ने ढोल पीटे
बुँदियों की बारात
३
अलकें खुलीं
साँवरी घटाओं की
मेघ निहाल
लगीं नाचने बूँदें
विद्युत के पंडाल
४
घन गरजे
घट छलक गया
पड़ी फुहार
भागे हवा छिछोरी
करके छेड़छाड़
५
सरसे मेघ
बरसे अमि धारे
पंख फुलाएँ
नीड़ छोड़के पंछी
पानी डुबकी मारें

- कृष्णा वर्मा
१ अगस्त २०२४

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