अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

            पियो शिकंजी

 
पियो शिकंजी नीबू की औ
पना आम का
गर्मी में ठंडा शर्बत है
बड़े काम का

जेठ जा रहा मेघ दिखे हैं
कुछ आषाढ़ी
बचे दिवस हैं इस गर्मी के
बस अब थोड़े
ठंडा पानी पियो तरलता
यह तन माँगे
बहुत खा लिये पिज्जा बर्गर
चाट पकौड़े
सावन बरसे खूब जपें हम
नाम राम का
गर्मी में ठंडा शर्बत है
बड़े काम का

गर्मी का मौसम कट जाए
बड़े जतन से
सुबह कलेवा है सत्तू का
सबसे अच्छा
जठर अग्नि के लिये भार है
भारी भोजन
खिचड़ी संग सलाद रात में
केवल कच्चा
दिन तपता है,नहीं सुहाना
समय शाम का
गर्मी में ठंडा शर्बत है
बड़े काम का

- सीमाहरि शर्मा
१ जून २०२४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter