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         शर्बत चुनाव का

 
अद्भुत है
शर्बत चुनाव का

करे किसी का मुँह मीठा यह
खट्टे करता दाँत किसी के
चबवा रहा चने लोहे के
बजें दाँत से दाँत किसी के
ठंडाई-कॉफी निभाव का
अद्भुत है
मौसम चुनाव का

केर-बेर का संग अनोखा
जैसे लस्सी-चाय मिलाई
यह छल करता, वह दे धोखा
रोचक उठा-पटक है भाई
पना-भंग के संग छलाव का
अद्भुत है
मौसम चुनाव का

सुरा पी रहे गंगा जल कह
अधर हँसें पर दिल जाता दह
मलिन कह रहे शेष सभी को
रहे गंदगी में जो रह-बह
सदाचार-संयम गलाव का
अद्भुत है
मौसम चुनाव का

- संजीव सलिल
१ जून २०२४

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