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         जलजीरा भी सामने

 
सूरज ने भट्ठी जला, तपा दिया बैसाख
सूखे कंठ पुकारते, एक बूँद भी लाख

धावा बोला ग्रीष्म ने, लू को लेकर साथ
जलजीरा भी सामने, करता दो-दो हाथ

गरमी बढ़ती जा रही, 'एलनीनो' प्रभाव
पेड़ों के बिन भूमि भी, मानो बनी अलाव

शीतलता दे देह को, हल्का रखता पेट
जलजीरा सेवन किए, कम हो जाता 'वेट'

जलजीरे की ही तरह, आम पने का काम
ठंडी है तासीर भी, देता है आराम

कृत्रिम पेय को त्यागकर , पेय पीजिए शुद्ध
जलजीरा व शिकंजवी, छाछ पीयें प्रबुद्ध

जलजीरा कहता सुनो, दर्शन का भी सार
खट्टा-मीठा, चरपरा, यह जीवन है यार

-परमजीत कौर 'रीत'
१ मई २०२६

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