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         सबको रास आता

 

स्नेह जलजीरा सभी का खूब पाता
ग्रीष्म ऋतु में खूब सबको रास आता

देखिए तो हैं सभी इसके प्रशंसक
स्वाद का जादू असर अपना दिखाता

है बहुत से पेय अनुपम इस जहां में
साथ यह चुपचाप है सबका निभाता

स्वास्थ्यवर्धक गुण लिए सबके घरों में
हर समय शुभ स्थान है अपना बनाता

भाव समरसता लिए रहता हमेशा
बिन विचारे हाथ यह सबसे मिलाता

यह सभी आयोजनों की शान बनकर
रंग महफिल में सहजता से जमाता

ज़ायका नमकीन मीठा और खट्टा
जो लिया करता पलक पर है बिठाता

- सुरेन्द्रपाल वैद्य
१ मई २०२६

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