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वन शिरीष मुसकाये
 

सूरज अगन लगाये
वन-शिरीष मुसकाये

हरे-हरे पत्तों में खिलता
पवन झकोरों के सँग हिलता
बाग बहुत हरषाये

कुदरत रूप-रंग मनहारी
सँग शिरीष की शोभा न्यारी
मन की सुध बिसराए

अम्बर जब बरसे अंगारे
खिलते पुष्प लगें ज्यों तारे
हिम-दल बलि-बलि जाये

तरल हिमानी झरने गमकें
तरु शिरीष की कलियाँ छमकें
सूरज सँग बतियाये

- कल्पना मनोरमा
१५ जून २०
१६

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