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          मेरा ख़त

 

 

राजनीगंधा की जड़ में है
मेरा ख़त पूरा पढ़ लेना

अभी पढ़ा है मैंने जिसको
नाज़ुक गहरा प्यार है उसका
मेरे भी मन ने चाहा है
मैं तोलूँ सोने का सिक्का
मंगलसूत्र बनेगा पूरा
इसको हौले से गढ़ लेना

पुरवा में चर्चे उड़ते हैं
सभी डायरियाँ हुईं सयानी
बालक मेरी हँसी उड़ाते
दुनिया लगती है अनजानी
बचपन कहता है अम्मा से
बिस्किट के ऊपर लड़ लेना

खजुराहो घूमा तो देखा
मंदिर में फूलों का लेखा
अभी तैरनी हैं सरिताएँ
हाथों में है गहरी रेखा
कटी पतंगों से सीखूँगा
मंगल तारे तक चढ़ लेना

- अश्विनी कुमार विष्णु
१ सितंबर २०२१

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