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अभिव्यक्ति  

२९. ६. २००९

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । हाइकु
अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । नवगीत की पाठशाला

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हँसी तुम्हारी चंदा जैसी

 

हँसी
तुम्हारी चंदा जैसी,
चितवन फूल पलाश
बातें झरना यथा ओसकण
तारों भरा उजास

गुन-गुन
भौंरों जैसे गाना,
और शरारत से मुस्काना
हौले-से,
ही हमें चिढ़ाना
वादा कर फिर हाथ न आना
चमकाती लेकिन फिर भी हो
एक किरन की आस

हँसी
तुम्हारी चंदा जैसी,
चितवन फूल पलाश
बातें झरना यथा ओसकण
तारों भरा उजास

जो भी
दिन है साथ बिताए,
जस फूलों की घाटी घर
नोंक-झोंक
विस्मृति-स्मृति में,
एक क्षीरमय सुन्दर सर
मिलना तुम से तीरथ जैसा,
भूला - बिसरा रास

हँसी
तुम्हारी चंदा जैसी,
चितवन फूल पलाश
बातें झरना यथा ओसकण
तारों भरा उजास

- क्षेत्रपाल शर्मा

इस सप्ताह

गीतों में-
क्षेत्रपाल शर्मा

अंजुमन में-
डॉ. वशिष्ठ अनूप

छंद मुक्त में-
डॉ. अश्वघोष

क्षणिकाओं में-
अर्बुदा ओहरी

दोहों में-
चंद्रसेन विराट

अनुभूति का १३ जुलाई का अंक कदंब विशेषांक होगा। इस विशेष अवसर के लिए कदंब के फूल या पेड़ से संबंधित गीत, गज़ल, दोहा, हाइकु, क्षणिका,  मुक्तक और छंदमुक्त रचनाएँ आमंत्रित है। रचना भेजने की अंतिम तिथि १ जुलाई २००९ है।

पिछले सप्ताह
२२ जून २००९ के अंक में

गीतों में-
अनिरुद्ध नीरव

अंजुमन में-
शरद तैलंग

नई हवा में-
कमला निखुर्पा

दोहों में-
सनातन कुमार वाजपेयी 'सनातन'

पुनर्पाठ में-
अंधायुग पहला, दूसरा अंक

अन्य पुराने अंक

कार्यशाला-३ का विषय है 'सुख-दुख इस जीवन में', सभी के नवगीतों का स्वागत है।

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है।

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
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३०,००० से अधिक कविताओं का संकलन
   
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