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वर्ष नया आया है
 
खुशियाँ वंदनवार सजाएँ
शुभ स्वागत नव वर्ष मनाएँ

बीती सुमधुर यादें ले कर
सपने हर शृंगार सजाएँ

मंजिल पाने की हो चाहत
सच को ही आधार बनाएँ

वक्त भरे खुशियों से दामन
कदम बढ़ें न खार उलझाएँ

नफरत पनप सके न दिलों में
अमन दरो- दीवार सजाएँ

स्वार्थ कभी गुमराह करे ना
प्यार वतन के लिए सजाएँ

- ज्योतिर्मयी पंत
३० दिसंबर २०१३

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