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नए-वर्ष-के-सूरज-से-कुछ-उम्मीदों-के-साथ
 

दिनकर, वादा करो
सुबह, तुम दोगे अच्छी

रात
भयावह गई बुरे सपनों में डूबी
दिल घबराता रहा देख हर बात अजूबी
आनेवाली रात
नींद न टूटे कच्ची

कोर्ट कचहरी
पुलिस गबन अगणित घोटाले
रहे डराते हमें रात भर साये काले
रवि, ले आना
ढूँढ कोई तो सूरत सच्ची

चूनर
के चिथड़े, चीखें दहलाने वाली
महिषासुर के आगे दिखीं काँपती काली
नया सबेरा देख
डरे ना कोई बच्ची

ओम प्रकाश तिवारी
३१ दिसंबर २०१२

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