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नव वर्ष अभिनंदन

वक़्त चलता रहेगा

         

कई नववर्ष आये, कई बसंत बीते,
बीता शिशिर, बीते कई सावन रीते।
पर जो जहाँ था, वहीँ का वहीँ रहा,
बस दौर बदलता रहा, वक़्त चलता रहा।

वो पहले भी भूखा था, अब भी वो भूखा है,
आसमान तले, नंगे बदन, खाता रुखा सूखा है।
वो मजदूर है, वो किसान है, वो कलाकार है, वो बेकार है।
वो कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा,
वो निर्धन है, अशिष्ट है, अतः अछूत रहेगा,
इसी तरह दौर बदलता रहेगा, वक़्त चलता रहेगा।

ढलती है शाम, मैखाने उनसे हो जाते आबाद,
कहलाये अमीर, कहलाये बड़े, कहलाये ऊँचे और नवाब।
वो शिष्ट है क्योंकि धनदार है, पर आदत से लाचार है,
निर्धन, गरीब को ठुकराना, उनका ये अधिकार है।
जश्न और त्यौहार सब उनका है,
जीने का अधिकार भी उनका है, उनका ही रहेगा,
इसी तरह दौर बदलता रहेगा, वक़्त चलता रहेगा।

मनीष जैन

  

नए वर्ष की शुरूआत

एक पल
एक ऐसा पल
जो समेटे है
मिलन और जुदाई
एक पल ही तो है
जो जोड़े रखता है
अतीत को भविष्य से
आने वाले को जाने वाले से
सिर्फ़ मन के भाव बदलते है
यथार्थ में कुछ नहीं बदलता
बदलते है तो सिर्फ़ अहसास
नए सपने नई ख़्वाहिशें
आशा की नयी किरण
हौसलों के नए पंख
नववर्ष का आग़ाज़ है
मन की बाहें फैलाकर
इसका स्वागत करो
कहते है..
जब जागो तभी सवेरा
अब तो जागो
यादों की गढ़री बाँधो
और करो शुरुआत
एक नए युग की
नए वर्ष के
उगते सूरज के साथ।

निर्झर नीर
२८ दिसंबर २००९


 

 

 

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