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नव वर्ष अभिनंदन
2007

 सदा सुखद हो नूतन वर्ष

 

दिशा-दिशा में छाया हर्ष
सदा सुखद हो नूतन वर्ष

कठिनाई से भरा है जीवन
नहीं है झूठा खरा है जीवन
विजय हमारा है आदर्श
सदा सुखद हो नूतन वर्ष

विश्वास हमारा सदा अटल
करनी होगी स्वयं पहल
पाएँगे गौरव स्पर्श
सदा सुखद हो नूतन वर्ष

लगता सब कुछ नया नया है
और पुराना गया गया है
जीत लिया है फिर संघर्ष
सदा सुखद हो नूतन वर्ष

बीत गया सो बीत गया है
कुआँ पीर का रीत गया है
होगा अब तो नया विमर्श
सदा सुखद हो नूतन वर्ष

भास्कर तैलंग

 

नव वर्ष की शुभकामनाएँ

खिल गई है उपवनों में
गुलमोहर की डाल फिर
आ रहा है मुस्कराता
प्यार लेकर साल फिर।

पवन में मस्ती मिली है
साँस में खुशबू घुली है
लाज के सिंदूर रंग से
हैं गुलाबी गाल फिर।

नज़र के जो जाम छलकें
बन गई चिलमन ये पलकें
हो गई देखो नशीली
प्रियतमा की चाल फिर।

नवल आशा मुस्कराती
धवल कलियाँ खिलखिलाती
इंद्रधनुषी-सी सजी है
सुमन सुरभित डाल फिर।

कृष्णा खंडेलवाल 'कनक'

प्रतिज्ञा

आइए नया साल धूमधाम से मनाएँ
राष्ट्र के प्रति अपना समर्पण दोहराएँ
स्वार्थ अन्याय गरीबी को हराएँ
संवेदनशील व भावपूर्ण
जीवन अपनाएँ

---रीतेश गुप्ता

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