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         आ गया नवीन वर्ष

 
आ गया नवीन वर्ष का पुनीत पर्व
पुनि जगी प्रयत वसुंधरा लिए नवीन चेतना

हुई विलीन गत युगीन व्याधियाँ
मलीन हो गई विगत विडंबना
जगी समष्टि रूप ले नवाब्द का
उदित हुई नवल उषा निरंजना
छा गया नवीन हर्षमय मधुर प्रगीत
पुनि सजग हुई परंपरा लिए नवीन प्रेरणा

प्रमाद कह उठा कि जब टलो-टलो
अशौच ईर्ष्यादि भी ढलो-ढलो
तजो समस्त भेदभाव विकृतियाँ
मनुष्य शील पंथ पर चलो-चलो
बज उठा विकास राग कर्म वीण पर पुन:
हुआ उदित नवल प्रभात ले नवीन कल्पना

विनष्ट हुई शक्ति अंधकार की
प्रदीप्त हुई ज्योति मधुर प्यार की
सबल हुआ है विश्व भ्रातृ भाव शुचि
करो न वार्ता जगत संहार की
मनुष्य के संग मनुष्य चल सके पुन:
पुलक-पुलक करो नवीन पंथ
की समस्त जन गवेषणा

- प्रो. हरिशंकर आदेश
१ जनवरी २०२५

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