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प्रेम, शांति, सद्भावना |
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प्रेम- शांति, सद्भावना,
एका, यश, उत्कर्ष
हँसी-खुशी, संपन्नता, जग भर दे नव वर्ष
लिखें इबारत हर्ष की, तितली तेरे पंख
रहे देश में एकता, बजें प्रेम के शंख
ऐसा वर दो राम जी, बना रहे विश्वास
प्रेम, शांति, सद्भावना, भर दो मन उल्लास
देना था, देकर गई, ‘दीपक’ आधी रात
नई साल ले आ गई, खुशियों की सौगात
नई साल में भर दिए, ईश्वर ने उपहार
पाएँगे युग सारथी, मानवता के द्वार
उम्मीदें नव वर्ष का, करती हैं सम्मान
बनी रहेगी साल भर, चेहरों पर मुस्कान
- शिव कुमार “दीपक”
१ जनवरी २०२५ |
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