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मुरली पे सब जग वारी
     

 





 

 


 




 


मुरली पे सब जग वारी
पनघट पनघट अरु जमना तट, नटखट नट वनवारी ॥
गोकुल मथुरा अर बृन्दावन, या ब्रजभूमी सारी ॥
तीनहुँ लोक भुवन चौदह अर, आसुर सुर संसारी ॥
गोबरधन पर्वत का राजा, बंसी पर बलिहारी ॥

प्रेमजी प्रेम
२६ अगस्त २०१३

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