अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहे पुराने अंक संकलनअभिव्यक्ति कुण्डलियाहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

जनतंत्र हमारा 
 जनतंत्र को समर्पित कविताओं का संकलन 

 
 
नमन तुम्हें मेरे भारत
 

नमन तुम्हें मेरे भारत
तुमको हर साँस समर्पित है

यह चन्दन सी माटी मधुमय
जो जीवन सुमन खिलाती है
भीनी- भीनी मलयानिल भी
हौले -हौले दुलराती है

कण-कण बिखरी सुन्दरता
षडऋतुओं पर मन मोहित है

और कहाँ हम पायेंगे
ममता -करुणा से भीगे मन
रंग बिरंगे फूलों से
सजा झूमता हुआ चमन

है धर्म यहाँ का मानवता
शुभ गंगा -जमुनी संस्कृति है

वन्दनीय है वर्तमान
गौरवमय है जिसका अतीत
सोपान प्रगति के छू लेगा
आगत भी है मन में प्रतीत

इसकी गुरुता गरिमा पर
सम्पूर्ण विश्व आकर्षित है

- मधु प्रधान
१० अगस्त २०१५


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्राम गौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलन हाइकु हास्य व्यंग्य क्षणिकाएँ दिशांतर समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter