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जनतंत्र हमारा 
 जनतंत्र को समर्पित कविताओं का संकलन 

 
 
शुभ पर्व
 
देखो इस शुभ पर्व पर, खुश है वीर-जवान।
सीमा पर प्रहरी बना, अपना सीना तान।

थे अतीत के गर्भ से, निकले लाल तमाम।
'सोने की चिड़िया' सुनो, तभी पड़ा था नाम।

भ्रष्टाचारी कर रहे, भारत को कंगाल।
नेता जी ही लूटते, जनता का सब माल।

दिल में जोश, जुनून हो, हल होंगे सब काम।
भगत सिंह, सुखदेव, गुरू, अमर रहेंगे नाम।

आओ इस शुभ पर्व पर, नमन करें हर वीर।
काटी माँ के पैर की, जिन-जिन ने जंजीर।

बापू अपने देश का, सुन तू क्या है हाल।
झूठों को काजू मिले, सच को मिले न दाल।

आजादी का पर्व यह, आता है हर वर्ष।
देश भक्ति के गीत सुन, लोग जताएँ हर्ष।

याद रहे तुमको सदा, वीरों का बलिदान।
तन-मन-धन अर्पन किया, और लुटाए प्राण।

पीड़ा दायक है बहुत, बटवारे की पीर।
याद कारगिल की हमें, कर जाती गंभीर।

अब मज़हब के नाम पर, होता है संग्राम।
आग और भड़का रहे, सत्ता के कुछ नाम।

- अमन चाँदपुरी
१७ अगस्त २०१५

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