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हुए सभी टुनिया

बजा रहा मस्ती में भोला हरमुनिया
खींच रहे बाबाजी गायन
निरगुनिया

रंगे बिन न मानेंगे कहें मिर्च-हल्दी
आलूजी! व्यर्थ की करिए मत जल्दी
रँगा-पुता देखेगी तुमको
अब दुनिया

धानी रंग लाया हूँ बोल रहा धनिया
कुर्ता ना रंग जाए घबराता बनिया
कहाँ छिपे सुगनचंद पूछे
ललमुनिया

गले मिले प्यार से बैंगन सँग आलू
मधुमक्खी टेरती कहाँ जाय भालू
गुझियों में रंग भर रखती
है झुनिया

ला रहे अकलचन्द दूर गई कौड़ी
कहाँ गई थाल-भरी भंग की पकौड़ी
किसी ने न छोड़ीं वे हुए
सभी टुनिया

- पंकज परिमल
१ मार्च २०२०

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