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गरमागरम वाह ये भुट्टे






 

भुट्टे भून रहा है कोई
महक किधर से आई है ?

कदमताल करते पावों हैं
घ्राण इन्द्रियाँ जागी-जागी
बरसातों के इस मौसम में
बिछी गंध है कोयले-आगी

धुँए पागते पट-पट, पुट-पुट
की स्वर लहरी छायी है

घने सुनहरे बालों वाला
निकल दुशालों से आया है
तनी रीढ़ पर मोती लादे
खिलकर हँस-हँस बतियाया है

गरम-गरम कब मुँह में आये
जीभ आज ललचायी है

थोड़ा नींबू नमक चटपटा
थोड़े मन के स्वाद सलोने
धीमे-धीमे भुना आँच पर
मिला हाथ में, चला तरोने

गरमागरम आह ये भुट्टे
वाह ! वाह ! कहलायी है

- शीला पांडे
१ सितंबर २०२०

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