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अनुभूति में
नीरज गोस्वामी की
रचनाएँ -

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गीत तेरे
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जिस पे तेरी नज़र
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तेरे आने की ख़बर
दिल का दरवाज़ा
दिल का मेरे
दिल के रिश्ते
नीम के फूल
पहले मन में तोल
फूल ही फूल
फूल उनके हाथ में जँचते नहीं
बात सचमुच
भला करता है जो
मान लूँ मैं
मिलने का भरोसा
याद आए तो
याद की बरसातों में
याद भी आते क्यों हो
ये राह मुहब्बत की
लोग हसरत से हाथ मलते हैं
वो ही काशी है वो ही मक्का है
साल दर साल
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गीत तेरे
गीत तेरे जब से हम गाने लगे
भीड़ में सबको नज़र आने लगे
सोच को अपनी बदल कर देख तू
मन तेरा गर यार मुरझाने लगे
बिन तुम्हारे खैरियत की बात भी
पूछते जब लोग तो ताने लगे
वो मेहरबां है तभी करना यकीं
जब बिना मांगे ही सब पाने लगे
प्यार अपनों ने किया कुछ इस तरह
अब मेरे दुश्मन मुझे भाने लगे
सच बयानी की गुजारिश जब हुई
चीखते सब लोग हकलाने लगे
खार तेरे पाँव में 'नीरज' चुभे
नीर मेरे नैन बरसाने लगे
२० अप्रैल २००९
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