अंजुमनउपहारकाव्य संगमगीतगौरव ग्रामगौरवग्रंथ दोहेरचनाएँ भेजें
पुराने अंकसंकलनहाइकु हास्य व्यंग्यक्षणिकाएँदिशांतर

अनुभूति में नीरज गोस्वामी की
रचनाएँ -

नई रचनाएँ-
गर हिम्मत हो
तल्खियाँ दिल मे
तोड़ना इस देश को

दोहों में-
मूर्खता के दोहे

अंजुमन में-
आए मुश्किल
उन्हीं की बात होती है

कभी ऐलान ताकत का
कहानी में
कुछ क़तए
कुछ रुबाइयाँ
कौन करता याद
कौन देता है कौन पाता है
गीत तेरे
जड़ जिसने थी काटी
जहाँ उम्मीद हो ना मरहम की

जिस पे तेरी नज़र
झूठ को सच बनाइए साहब
तेरे आने की ख़बर
दिल का दरवाज़ा
दिल का मेरे
दिल के रिश्ते
नीम के फूल
पहले मन में तोल
फूल ही फूल

फूल उनके हाथ में जँचते नही
बात सचमुच
भला करता है जो
मान लूँ मै
मिलने का भरोसा
याद आए तो
याद की बरसातों में
याद भी आते क्यों हो
ये राह मुहब्बत की
लोग हसरत से हाथ मलते हैं

वो ही काशी है वो ही मक्का है
साल दर साल

`

दिल का मेरे

दिल का मेरे ये भी इक फितूर है
मानना हरगिज़ नहीं तू दूर है

मीच कर के आँख फिर से देखिए
हो गया गर ख्वाब चकनाचूर है

बात में उसकी सदा रहता है सच
जो नहीं मालिक महज़ मजदूर है

आलम-ए-तनहाई का दोज़ख़ है क्या
पूछ उससे जो बहुत मशहूर है

धूल उसने झोंक दी है आँख में
जिसको समझे थे के इनका नूर है

ग़म खुशी में फ़र्क ही करते नहीं
क्या अजब ये अश्क का दस्तूर है

साथ तेरे गर वो चल पाया नहीं
सोचना नीरज बहुत मजबूर है

24 जुलाई 2007

इस कविता पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमनउपहारकविकाव्य चर्चाकाव्य संगमकिशोर कोनागौरव ग्रामगौरवग्रंथदोहेरचनाएँ भेजें
नई हवा पाठकनामा पुराने अंक संकलनहाइकुहास्य व्यंग्यक्षणिकाएँ दिशांतरसमस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक माह की 1–9 –16 तथा 24 तारीख को परिवर्धित होती है