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१. ६. २०१५--

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सोनकली

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बापू ने तो नाम धरा था
उसका सोनकली।
लेकिन
माँ अक्सर कहती है
उसको करमजली।

रोज भुरहरे
घर आँगन में
झाड़ू ले जुटना।
लीपा पोती
चौका बर्तन में
दिन भर खटना।
बासी-कूसी खाकर भी
खुश रहती है पगली।

देर रात तक
दौड़ दौड़
घर का सब काम करे।
तिस पर भी
जाने क्यों अम्मा
रह-रह कर बिफरे।
एक पैर पर नाचा करती है
जैसे तितली।
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- मृदुल शर्मा

 

इस सप्ताह

गीतों में-

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मृदुल शर्मा

अंजुमन में-

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तरुणा मिश्रा

छंदमुक्त में-

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विमलेश त्रिपाठी

कुंडलिया में-

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गाफिल स्वामी

पुनर्पाठ में-

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विपिन पँवार निशान

पिछले सप्ताह
२५ मई २०१५ के बाँस विशेषांक में

अंजुमन में-अश्विनी कुमार विष्णु
कल्पना रामानी हरिवल्लभ शर्मा पवन प्रताप सिंह
सुरेन्द्रपाल वैद्य

दोहों में-
कल्पना मिश्रा वाजपेयी

ज्योतिर्मयी पंत
परमजीत कौर रीत
पीयूष द्विवेदी भारत
सीमा हरिशर्मा

हाइकु में-
पच्चीस से अधिक रचनाकार

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन

सहयोग :
कल्पना रामानी